Saturday, March 8, 2008

सामना की खबर पर ढं ढोरची का जोड-तोड

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भाया!जब भी देश वासी तुम्हें भाव देना कम कर दे या चुनाव का मौसम आ जाए,तो कुछ ऐसा उछाल मारों की सभी डु्गडुगी सुन कर तुम्हारे आस पास मजमा लगा लें। ऐसे समय में अगर तुम्हें मदारी बनना पड़े तो गुरेज़ मत करों ।भले ही तुम्हारे कहे से देश का बंटाधार होता हो तो होनें दो...किसी का सिर फूटता है तो फूटनें दो...कुर्सी के पानें के लिए वह अपना ही सिर फोड़ सकते हैं तो तुम्हारे सिर फूटनें की किसी को क्या परवाह! इतिहास गवाह है इस कुर्सी के लिए बेटों ने बाप को नही बख्शा तो ऐसे में आम आदमी की हैसीयत ही क्या है? अभी कुछ समय पहले ही सामना में बिहारीयों के बारे में छपे एक वक्तव्य की ओर ध्यान गया।,.......... लेकिन मुझे लगा की बात पूरी नही कहीं गई है .......सो उसी को पूरा करनें का जतन कर रहा हूँ। आप सभी नें यह पढा या सुना जरूर होगा-




एक बिहारी सौ बीमारी।
दो बिहारी लड़ाई की तयारी।
तीन बिहारी ट्रेन हमारी।
पाँच बिहारी, सरकार हमारी।

अब इस से आगे हमारे विचार भी जानें-
छे बिहारी मति गई मारी....
दस बिहारी महाराष्टीय में आग लगानें की तैयारी....

अरे भाया! देश मे पहलें ही बहुत मुसीबत है....जिस का खामियाजा हम जैसा आम आदमी भुगत रहा है...वैसे ही इतनी मारा मारी चल रही है तुम क्यों नया शगूफा छोड़ कर मरे हुओं को और मारना चाहते हो? अपनें ही देश में देशवासीयों से उन की आजादी का हक छीनना चाहते हो? ...पता नही इतना सब कुछ हो रहा है और हमारे मनमोहन प्यारे और राज माता सोनिया जी की पार्टी कुछ कर क्यों नहीं रही...?....पता नही क्या खिचड़ी पक रही है.......चुनाव जो आनें वाले हैं।......

1 टिप्पणियाँ:

Computador says:
April 23, 2008 at 10:29:00 PM GMT+5:30

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