Sunday, November 30, 2008

तुम्हे नेता किसने बनाया......सा....

1 टिप्पणियाँ

आए दिन हो बंम के धमाके जनता मर मर जाए।
नित नये वादे कर कर के ये जनता को भरमाए।
कोई चारा खा कर बैठा , जरा नही शर्माए ।
कोई जवानों के कफनों पर, बैठ कमीशन खाए।

इनकी बला से भाड़ मे जाए देश की जनता सारी।
इन को बस कुर्सी ही है , भाया ! सब से प्यारी ।
रंगें सियार सभी यहाँ हैं, क्या जनता करे बेचारी।
मुखिया प्यारे शर्म आ रही, देख तेरी सरदारी।

जरा सोचकर देखो भाया! कुर्सी किसने दी है।
देशकी भोली जनता की, कब कब किसने ली है।
जनता के हाथों मे बस इक मत की ताकत दी है।
चोर उच्चक्कों मे से नेता चुनने की लाचारी है।

जिस देशके विभाग-सरकारें नेता सबहो सोये।
फिर आएगें आतंकी प्यारे! रोक सका कब कोये।
राम भरोसे देश है अपना ,कौन बचाए तोहे।
चलो बैठ कर अपनी-अपनी छाती पीट के रोये।

सब के साथ मिल ढंढोरची पूछे एक सवाल-
तुम्हें नेता किसनें बनाया ......सा....

1 टिप्पणियाँ:

Pt. D.K.Sharma "Vatsa" says:
November 30, 2008 at 6:40:00 PM GMT+5:30

कहते है की इतिहास हमेशा अपने आप को दोहराता है.जब मोहम्मद गौरी/महमूद गजनबी जैसे आक्रमणकारियों का ये देश कुछ नहीं बिगाड पाया, जो कि सत्रह-सत्रह बार इस देश को मलियामेट करके चलते बने, तो ये लोग अब क्या उखाड लेंगे.
वैसे भी ये बापू का देश है(भगत सिहं का नाम किसी साले की जुबान पे नहीं आयेगा). अहिंसा परमो धर्म:

अब और क्या कहें, सरकार चाहे अटल बिहारी वाजपेयी की हो या मनमोहन सिंह की, आतंकवाद हमारी नियति है। ये तो केवल भूमिका बन रही है, हम पर और बड़ी विपत्तियां आने वाली हैं।क्यूं कि 2020 तक महाशक्ति बनने का सपना देख रहे इस देश की हुकूमत चंद कायर और सत्तालोलुप नपुंसक कर रहे हैं।

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