Monday, July 30, 2007

समीर-संदेसा

8 टिप्पणियाँ
अहमक या असहमत पूछ रहें हैं आप ।
अपनें-अपनें नाम का कब कोई करता जाप ।
कब कोई करता जाप,सच किस को भाता है,
अपना बोया आप यहाँ,हर कोई खाता है ।
कहे ढंढोरची पर की तुम चिन्ता छोड़ों,
अपने साथ सहर्ष आज हम को भी जोड़ो ।

8 टिप्पणियाँ:

ऒशॊदीप says:
July 30, 2007 at 10:25:00 PM GMT+5:30

मान गए उस्ताद!एकदम सही बात।

परमजीत बाली says:
July 30, 2007 at 10:45:00 PM GMT+5:30

हाजिर जवाब!

Udan Tashtari says:
July 30, 2007 at 11:01:00 PM GMT+5:30

बहुत खूब. छेड़ो रहो तान, महाराज!! सुन रहे हैं :)

शुभचिंतक says:
July 31, 2007 at 1:55:00 AM GMT+5:30

दोहा रोला एक दम दुरुस्त है। लिखते रहें !!!

sunita (shanoo) says:
July 31, 2007 at 1:31:00 PM GMT+5:30

ये क्या चिट्ठे मे चिट्ठा ढूँढते हम यहाँ तक आये सोचा कौन करता होगा इतना कष्ट हमारी टिप्पणी सबसे पहली होगी... मगर यहाँ तो सब पहले से ही विराज मान है....बूहूहू...:(

सुनीता(शानू)

अनूप शुक्ला says:
August 8, 2007 at 6:19:00 AM GMT+5:30

लिखते रहो!

prabhakar says:
August 15, 2007 at 4:12:00 PM GMT+5:30

स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनायें।

Nishikant Tiwari says:
September 1, 2007 at 3:56:00 PM GMT+5:30

लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld

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